प्रष्टव्य। विश्वामित्र राजा था धनी था। वह भी कुछ पचास सहस्र लोग एकत्रित करके अपने व्यक्तिगत उत्थान के लिए उनसे अमुक मन्त्र का जप करवा सकता था। आधे घण्टे में कार्य सम्पन्न हो जाता। पर नहीं किया। तो कुछ तो बाधक विधि निषेध होना चाहिए। जिसका कर्म उसका फल सामान्य नियम है। फल का भोग कोई अन्य कर सके इसका क्या नियम।