व्रात्यत्व। वैदिक कर्म अधिकार के लिए अमुक संस्कार विशेष विधिवत तथा समय पर नहीं हुआ तो व्रात्य उपाधि लग जाती है। कर्मों में अनधिकृत माने जाते हैं। विशेषतः वैदिक संन्यासाश्रम इत्यादि में भी। इसके परिहारार्थ शास्त्रों में विधि उपलब्ध हैं। कठिन हो सकते हैं पर अवश्य सम्भाव्य।