विदुर उवाच। ॰अमुक॰योनावहं जातो नातोऽन्यद्वक्तुमुत्सहे। ॰॥ ब्राह्मीं हि योनिमापन्नः सुगुह्यमपि यो वदेत्। न तेन गर्ह्यो देवानां तस्मादेतद्ब्रवीमि ते ॥६॥ उद्योगपर्व अ॰४१ । सनत्सुजातीयभाष्य में आगे के बातों को औपनिषदिक मोक्षार्थ तत्त्वज्ञान बताया गया है। अर्थात पंचम वेद महाभारत का यह वेदान्त सब के लिए है। शास्त्र अनुमत सार्वजनिक ज्ञानकाण्ड है।

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