प्र॰। साधु कौन। उ॰। शब्दकोश में इसका सामान्य अर्थ सभ्य सज्जन परोपकारी इत्यादि दिये गये हैं। पर शास्त्र में इसकी एक ठोस परिसीमा है। मनु के द्वितीय अध्याय ग्यारहवाँ सूत्र में स्पष्ट निर्देश है कि श्रुतिस्मृति को अवमन्य करनेवालों को साधुजन द्वारा बहिष्कृत होना चाहिए। अर्थात जो श्रुतिस्मृति की अवमानना करें वे साधु नहीं।