अथर्व ११॰५ । यहाँ ब्रह्मचारी पुरुष तथा ब्रह्मचर्य पालन करती कन्या का कथन है। सूत्र सत्रह के सायणभाष्य में ब्रह्मचारी द्वारा वेदाध्ययनार्थ कृत कुछ कर्मों को ब्रह्मचर्य माना गया। अर्थात वेदाध्ययन स्वयम ब्रह्मचर्य नहीं। इन्द्रिय संयम उपवासादि व्रत ब्रह्मचर्य के उदाहरण। तथा स्पष्टतः कन्या के लिए पति प्राप्त्यर्थ ये कर्म विहित है वेदाध्ययनार्थ नहीं। स्मृत्यादि शास्त्र में अमुक संस्कार विशेष के नियम इस के अनुरूप ही प्रतीत होते हैं।

Reply to this note

Please Login to reply.

Discussion

No replies yet.