उद्धृतव्य। शास्त्र के सम्बन्ध में अनेक भ्रम तथा कुतर्कों का खण्डन धर्मालोक पुस्तक सरणी में दशकों पूर्व किया गया है। भाषा हिन्दी। अभिलेखालय जालस्थान पर इसके अंकीय संस्करण उपलब्ध हैं।
उद्धृतव्य। शास्त्र के सम्बन्ध में अनेक भ्रम तथा कुतर्कों का खण्डन धर्मालोक पुस्तक सरणी में दशकों पूर्व किया गया है। भाषा हिन्दी। अभिलेखालय जालस्थान पर इसके अंकीय संस्करण उपलब्ध हैं।
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