इस सामान्य तर्क से विश्वामित्र का वृत्तान्त अखण्डित रह जाता है। मतंग के परिस्थिति विशेष के लिए विधि प्रभेद की अनुपलब्धि के कारण उसका वृत्तान्त भी यथावत प्रामाणिक। तो इस विषय पर शास्त्र के इन अम्शों में कोई बडी विसंगति विदित नहीं।
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