आचरण प्रवचन भेद। वैदिक समाज मूलतः वैदिक है वेदादिशास्त्र की मान्यता से तथा आचरण से। अर्थात आचरण प्रवचन में साम्यता। शास्त्र विरुद्ध दो स्पष्ट उदाहरण हैं सांख्य तथा बौद्ध॥ सांख्य सिद्धपुरुष। ब्रह्मसूत्रभाष्य। अ॰२ पा॰१ सू॰१ । ततश्च पूर्वसिद्धायाश्चोदनाया अर्थो न पश्चिमसिद्धपुरुषवचनवशेनातिशंकितुं शक्यते। अर्थात किसी सिद्धपुरुष के शास्त्र विरोधी मत मान्य नहीं शास्त्र ही मान्य। ये है शास्त्र सम्मत आचरण शास्त्र विरोधी प्रवचन॥ बौद्धावतार। आचरण प्रवचन दोनों शास्त्र विरोधी। इसलिए अवैदिक संप्रदाय॥ अन्ततः शास्त्र विरोधी आचरण शास्त्र सम्मत प्रवचन। ये स्पष्ट ढोंग है। प्राचीन भारत में धार्मिक क्षेत्र में ढोंग के लिए आर्थिक दण्ड का प्रावधान था।

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