स्मर्त्तव्य। अमुक स्मृति विशेष के बारहवाँ अध्याय एकसौआठ से एकसौपन्द्रहवाँ सूत्रों में शिष्टा दशावरा अथवा त्र्यवरा परिषद द्वारा धार्मिक विषयों में लिए गये निर्णय मान्य बताया गया है। परन्तु इससे शास्त्र परिवर्तनीय नहीं। अनाम्नातेषुधर्मेषु से स्पष्ट है कि जो शास्त्रोक्त धार्मिक नियम हैं उनके अतिरिक्त विषयों पर ही निर्णय लेने की यह विधि है। यह भी कि तामसिकता अथवा अज्ञानता में लिए गये निर्णय अनाचरणीय।