वस्तुतः भाषा में स व्य इत्यादि उपसर्ग जोडने की शैली सामान्य है। जैसे कि दो तु एक सएक। यह भी संश्रृंखल कलन लेखन है तथा बिना कोष्ठक के भी स्पष्ट अर्थ। इस लेखन विधि में चतुर्थ समीकरण। चुपरि तु व्यम्शावका घ्नविशील सविघन घ्नचुशील।
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