त्र्यवरा। तो यह था तीन का महत्व। दस की सहायता से तीन की स्थापना। तीन द्वारा अमुक नवाचरण का प्रतिपादन। और ये सब शास्त्र सम्मत परिवर्तन कहा जाना।
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