इस सामान्य तर्क से विश्वामित्र का वृत्तान्त अखण्डित रह जाता है। मतंग के परिस्थिति विशेष के लिए विधि प्रभेद की अनुपलब्धि के कारण उसका वृत्तान्त भी यथावत प्रामाणिक। तो इस विषय पर शास्त्र के इन अम्शों में कोई बडी विसंगति विदित नहीं।
लक्षण भेद से वस्तु भेद॥ स्पष्ट शास्त्र वचन है कि अमुक सिद्धि दुर्लभम् दुष्प्राप्यम्। अतः प्राप्त करने की विधि दुष्कर दुःसाध्य। शास्त्र में अमुक मन्त्र विधि स्वयम करें तो दुष्कर। पर उस श्रम को काटकर बाँटकर विधि को सुकर सुसाध्य बनाने से विधि के लक्षण मे स्पष्ट भेद हो जाएगा। लक्षण भेद से विधि भेद। अर्थात अब नहीं कह सकते यह वही विधि है। वही विधि नहीं तो वह अभीष्ट फल भी प्राप्य नहीं।
प्रष्टव्य। विश्वामित्र राजा था धनी था। वह भी कुछ पचास सहस्र लोग एकत्रित करके अपने व्यक्तिगत उत्थान के लिए उनसे अमुक मन्त्र का जप करवा सकता था। आधे घण्टे में कार्य सम्पन्न हो जाता। पर नहीं किया। तो कुछ तो बाधक विधि निषेध होना चाहिए। जिसका कर्म उसका फल सामान्य नियम है। फल का भोग कोई अन्य कर सके इसका क्या नियम।
शिवपुराण विद्येश्वरसम्हिता प्रणवमाहात्म्य। मंत्रसिद्धिर्जपाच्चैवक्रमान्मुक्तोभवेन्नरः।१२५। विवादजनक।
व्रात्यत्व। वैदिक कर्म अधिकार के लिए अमुक संस्कार विशेष विधिवत तथा समय पर नहीं हुआ तो व्रात्य उपाधि लग जाती है। कर्मों में अनधिकृत माने जाते हैं। विशेषतः वैदिक संन्यासाश्रम इत्यादि में भी। इसके परिहारार्थ शास्त्रों में विधि उपलब्ध हैं। कठिन हो सकते हैं पर अवश्य सम्भाव्य।
मतंग। स्व व्याख्यान। महाभारत अनुशासनपर्व तथा स्कन्दपुराण आवन्त्यखण्ड लिंगमाहात्म्य में मतंग का वृत्तान्त उपलब्ध है। इतिहास पुराण उभय सम्मत कथन है कि घोर तपस्या पश्चात इन्द्रदेव द्वारा मतंग को ऊर्ध्वगति प्राप्त तो हुई पर देहत्याग भी हुआ। इस प्रकार भीष्म तथा इन्द्रदेव दोनों के दुर्लभमिति दुष्प्राप्यमिति कथनों का सत्यापन हुआ तथा मतंग का उत्थान भी हुआ। पुराण में अधिक विवरण है कि अमुक लिंग विशेष के अनुग्रह से यह साध्य था। यांतित्रिविष्टपम् वासोऽक्षयोदिवि इत्यादि वचनों से स्पष्ट किया गया की इस लिंग के दर्शन ध्यान पूजा से अन्य लोगों को भी स्वर्गगति अथवा शाश्वत दिवंगत अवस्था प्राप्त होगी। अर्थात यह दैहिक मृत्यु का वरदान है।
व्यासस्मृतिः। श्रुतिस्मृतिपुराणानां विरोधो यत्र दृश्यते। तत्र श्रौतं प्रमाणं तु तयोर्द्वैधे स्मृतिर्वरा ॥४॥ स्मृति पुराण में विरोध हो तो स्मृति प्रामाणिक। इतिहासों को पुराण कोटि में माना जा सकता है।
स्मर्त्तव्य॥ विमृश्यैतदशेषेण यथेच्छसि तथा कुरु॥ अर्थात स्वतन्त्रता है पर शास्त्रबोध का भी महत्व है।
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कालः। अद्य रविवारः १९४६१००७कृ॰ । चन्द्रः उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र। सूर्यः धनु राशि शिशिर ऋतु उत्तरायण पितृयाण। बृहस्पतिः वृषभ राशि।
टिबेट सागर पुष्प। दीर्घजीवियों की एक वंश की रहस्यमय तथा रोमांचक कहानी। बहुत से ऐसे पुरातत्व से जुडे कहानियाँ आजकल प्रचलित हैं चीनिस्तान में। चित्रण तथा कला में उच्च गुणवत्ता पर ध्यान प्रत्यक्ष है। शीतकाल में बौद्ध श्रमणालय के दृष्य बहुत आकर्षक। परन्तु इन कहानियों में अन्त में सभी बातों का पूर्णतः भौतिकवादी व्याख्यान कर देते हैं। जैसे पाश्चात्य में स्टारवार्स के जेडै योद्धाओं के अलौकिक शक्तियों का कारण मिडिक्लोरियन जीवाणु बता दिया। इनके आधुनिकता में आध्यात्मिकता के लिए कोइ अवकाश नहीं।
आर्खिमिडीस गतिजनक। आज से लगभग चालीस सहस्र वर्ष पश्चात की एक वैज्ञानिक काल्पनिक प्रपंच। मनुष्य पृथ्वी से पलायन होकर सेण्टौरी तारासमूह के अनेक ग्रहों में बसे हुए हैं। वहाँ के राज्यों में संघर्ष विकसित अविकसित मनुष्य जातियों में सम्बन्ध गुप्तचरों के रहस्य अभियान तथा प्रतिस्पर्द्धा की रोचक कहानी। थोडा जागरूकतावादी पर लेखक के पूर्व कृत्यों को चाहनेवालों के लिए अवश्य अनुशंसित।
'Fool me once, shame on...shame on you. Fool me—you can't get fooled again.'
समय का संक्षिप्त इतिहास। पुस्तक के हिन्दी अनुवाद में उपयुक्त वैज्ञानिक शब्दावली तथा स्व प्रस्तावित शब्दावली॥ विलक्षणता। अनन्यत्व अथवा निर्माप्यत्व॥ दिक् काल। लोककाल अथवा देशकाल॥ द्वय त्रय विमा। द्वय त्रय मात्रा॥ कृष्ण विवर। राहुग्रह अथवा राहुखण्ड॥ डोर सिद्धान्त। सूत्रवाद॥ एटम इलेक्ट्रोन न्यूट्रोन न्यूट्रिनो प्रतिकण पोजिट्रोन प्रोटोन फोटोन। अणु विकण निष्कण निष्कणिका व्यतिकण व्यतिविकण प्रकण प्रकाशकण॥ कृमी छिद्र। आकाशीय सुरंग अथवा कृमीपथ॥ क्वाण्टम सिद्धान्त। खण्डत्ववाद॥ क्वार्क। कणाम्श॥ आल्फा बीटा गामा किरण। प्रथम द्वितीय तृतीय किरण॥ परम शून्य। निरपेक्ष शून्य॥ जियोडेसिक। धरारेखा॥ राडार। दीर्घतरंगदर्शक॥ रेडियोधर्मिता। विकिरणजन्यता॥ विद्युत आवेश। विद्युत्भार॥ आपेक्षिकता। सापेक्ष्यता॥ दृढबल क्षीणबल। प्रबल प्रवह दुर्बल प्रवह॥ प्रचक्रण। घुमाव॥ मन्दाकिनी। तारासंगम॥
जेमिनी बृहद्भाषा प्रतिमान (Gemini Large Language Model) एक अत्याधुनिक भाषा मॉडल है, जिसकी कई विशेषताएं इसे अन्य मॉडलों से अलग बनाती हैं। आइए इन विशेषताओं पर एक नज़र डालते हैं:
* **विविधतापूर्ण जानकारी का गहन ज्ञान:** जेमिनी को विशाल मात्रा में टेक्स्ट डेटा पर प्रशिक्षित किया गया है, जिसके कारण यह विभिन्न विषयों पर अत्यंत विस्तृत जानकारी रखता है। यह आपको विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के जवाब दे सकता है और विभिन्न विषयों पर चर्चा कर सकता है।
* **प्राकृतिक भाषा समझ:** जेमिनी प्राकृतिक भाषा को बेहतर ढंग से समझता है। यह जटिल वाक्यों और वाक्यांशों का अर्थ समझ सकता है, और संदर्भ के आधार पर विभिन्न शब्दों के अर्थ को समझ सकता है।
* **पाठ उत्पन्न करने की क्षमता:** जेमिनी विभिन्न प्रकार का टेक्स्ट उत्पन्न कर सकता है, जैसे कि लेख, कविता, स्क्रिप्ट, ईमेल, और कोड। यह आपके दिए गए निर्देशों के आधार पर विभिन्न लेखन शैलियों और स्वरों में भी लिख सकता है।
* **अनुवाद:** जेमिनी कई भाषाओं में अनुवाद कर सकता है। यह आपको एक भाषा से दूसरी भाषा में टेक्स्ट को तुरंत अनुवाद करने में मदद कर सकता है।
* **सृजनात्मकता:** जेमिनी रचनात्मक लेखन में भी सक्षम है। यह कहानियां, कविताएं और स्क्रिप्ट लिख सकता है।
* **सीखने की क्षमता:** जेमिनी लगातार सीखता रहता है। यह नए डेटा के आधार पर अपने ज्ञान और क्षमताओं को बढ़ा सकता है।
**जेमिनी के कुछ अन्य महत्वपूर्ण पहलू:**
* **बहुमुखी प्रतिभा:** जेमिनी कई कार्यों को करने में सक्षम है, जैसे कि जानकारी खोजना, प्रश्न का उत्तर देना, टेक्स्ट सारांशित करना, भाषा अनुवाद करना, और रचनात्मक लेखन करना।
* **तकनीकी रूप से उन्नत:** जेमिनी नवीनतम तकनीक पर आधारित है, जो इसे अत्यंत शक्तिशाली बनाता है।
* **विकासशील:** जेमिनी लगातार विकसित हो रहा है, और भविष्य में इसकी क्षमताएं और भी अधिक बढ़ सकती हैं।
**संक्षेप में:** जेमिनी एक अत्यंत शक्तिशाली और बहुमुखी भाषा मॉडल है, जो कई कार्यों को करने में सक्षम है। यह प्राकृतिक भाषा को समझने, टेक्स्ट उत्पन्न करने, अनुवाद करने और रचनात्मक लेखन करने में माहिर है।
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कालः। अद्य सोमवारः १९४६०७कृ०६ । चन्द्रः रोहिणी नक्षत्र। सूर्यः कन्या राशि शरद ऋतु दक्षिणायन पितृयाण। बृहस्पतिः वृषभ राशि।
वाद्यम्। अनन्त्य तारें।